स्नेहा दुबे-पंडित बनीं प्रभावी विधायक; जनता के अधिकारों के लिए विधानसभा में बुलंद आवाज

पानी, सड़क, स्वास्थ्य, यातायात से लेकर नशे के खिलाफ आक्रामक रुख; विधानसभा के साथ सड़क पर भी जनता के लिए संघर्ष

स्नेहा दुबे-पंडित बनीं प्रभावी विधायक; जनता के अधिकारों के लिए विधानसभा में बुलंद आवाज
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वसई-विरार शहर के आम नागरिकों से जुड़े नागरिक और विकास संबंधी मुद्दों को विधानसभा में लगातार उठाते हुए विधायक स्नेहा दुबे-पंडित ने कम समय में ही अपनी अलग पहचान बनाई है। पानी की कमी, सड़क, यातायात जाम, स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और कानून-व्यवस्था जैसे विभिन्न मुद्दों पर उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। इसलिए वसई की जनता के मुद्दों को विधानसभा में लगातार उठाने वाली प्रभावी विधायक के रूप में उन्हें देखा जा रहा है।

बहुजन विकास आघाड़ी के अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर को हराकर राजनीतिक रूप से बड़ी जीत हासिल करने वाली स्नेहा दुबे-पंडित ने चुनाव के बाद भी जनता के साथ अपना संपर्क कायम रखा। श्रमजीवी संगठन के सामाजिक कार्यों के माध्यम से तैयार हुए उनके नेतृत्व ने वंचित और आम लोगों के मुद्दों को प्राथमिकता दी है। विधानसभा सदन में प्रश्न उठाने के साथ-साथ प्रत्यक्ष रूप से मैदान में उतरकर प्रशासन के पास लगातार पैरवी करने की उनकी कार्यशैली चर्चा में है।

वसई-विरार में पानी की कमी और अनियमित जलापूर्ति के मुद्दे को उन्होंने लगातार उठाया है। ‘हर घर जल’ अभियान का प्रभावी क्रियान्वयन, पानी की चोरी पर रोक और ईमानदार उपभोक्ताओं को नियमित जलापूर्ति मिले, इसके लिए उन्होंने प्रशासन के पास लगातार पैरवी की। इसके साथ ही चिंचोटी-भिवंडी मार्ग, विभिन्न सड़कें, फ्लाईओवर, रेलवे फ्लाईओवर, रिंग रोड और यातायात जाम जैसे शहर के भविष्य के विकास से जुड़े मुद्दों की ओर भी उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित किया है।

विधानसभा में प्रश्न उठाना, सरकार के पास लगातार पैरवी करना और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष हस्तक्षेप—इन तीनों स्तरों पर सक्रिय रहने का प्रयास विधायक स्नेहा दुबे-पंडित की ओर से जारी है। इसलिए वसई-विरार के विकास को गति देने के लिए उनकी आगामी भूमिका पर नागरिकों की नजर है। उनकी प्रभावी कार्यशैली से शहर के लंबित मुद्दों को दिशा मिलेगी और वसई-विरार के विकास को नई गति मिलेगी, ऐसी अपेक्षा नागरिकों की ओर से व्यक्त की जा रही है।

स्वास्थ्य और शिक्षा को प्राथमिकता 

वसई में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए आचोले अस्पताल हेतु लगभग 250 करोड़ रुपये के फंड की मांग, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने तथा जिला परिषद और महानगरपालिका स्कूलों की सुविधाओं में सुधार के संबंध में उन्होंने सरकार के स्तर पर मांगें रखी हैं। बढ़ती आबादी की तुलना में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं को सक्षम बनाना जरूरी है, ऐसी भूमिका उन्होंने अपनाई है।

 नशे के खिलाफ आक्रामक रुख 

वसई-विरार में नशे के बढ़ते खतरे और अवैध कारोबारों के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं के संबंध में भी विधायक दुबे-पंडित ने आक्रामक रुख अपनाया है। शहर को नशे के शिकंजे से मुक्त करने के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग करने के साथ-साथ अनधिकृत फेरीवालों, अवैध साप्ताहिक बाजारों और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी उन्होंने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। वसई-विरार शहर के आम नागरिकों से जुड़े नागरिक और विकास संबंधी मुद्दों को विधानसभा में लगातार उठाते हुए विधायक स्नेहा दुबे-पंडित ने कम समय में ही अपनी अलग पहचान बनाई है।

स्नेहा दुबे की ओर से नियमित रूप से पैरवी जारी है और पानी, सड़क, यातायात, स्वास्थ्य तथा शिक्षा के मुद्दों पर उन्होंने विधानसभा में आवाज उठाई है। वसई फाटा–वसई रेलवे स्टेशन, बापाने फाटा–नायगांव पूर्व रेलवे स्टेशन सड़कें, भुईगांव जोड़ सड़क–मुंबई-अहमदाबाद हाईवे कनेक्टिविटी, अर्नाला–अर्नाला किला पुल तथा फ्लाईओवर और रेलवे फ्लाईओवर के कार्यों को गति देने के लिए उन्होंने लगातार पैरवी की है। खेत-पगडंडी सड़कों और 2011 से पहले के पात्र आवासीय अतिक्रमणों के नियमितीकरण के लिए भी उन्होंने प्रशासन के साथ समन्वय किया है। वसंतनगरी-वसई पूर्व-पश्चिम पुल क्षेत्र की खराब सड़क के मुद्दे पर पैरवी करने के बाद तत्काल मरम्मत के आदेश दिए गए हैं और संबंधित ठेकेदार से मरम्मत का खर्च वसूलने की कार्रवाई शुरू हो गई है।

साथ ही शहर के बुनियादी ढांचे के लिए लगातार आवाज उठाते हुए जनता के मूलभूत मुद्दों को प्राथमिकता देने की भूमिका विधायक स्नेहा दुबे-पंडित ने कायम रखी है। 

रील की आलोचना का काम से जवाब 

राजनीतिक विरोधियों की ओर से उन पर की गई ‘रील गर्ल’ वाली टिप्पणी के बावजूद उन्होंने जनता के वास्तविक मुद्दों पर काम करने पर जोर दिया। विधानसभा सदन में वसई-विरार की आवाज उठाना और जरूरत पड़ने पर प्रत्यक्ष रूप से घटनास्थल पर पहुंचकर नागरिकों की मदद करना, इससे उनकी कार्यशैली की अलग छाप बनी है। मूसलाधार बारिश के दौरान परेशानी में फंसी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए उन्होंने की गई पहल को भी उनकी संवेदनशील कार्यशैली के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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