नई दिल्ली। दिल्ली में टीबी के खिलाफ चल रहे अभियान को अब और तेज किया जाएगा। अस्पताल में किसी भी बीमारी के इलाज के लिए भर्ती होने वाले मरीजों की सहमति लेकर टीबी की जांच कराने पर विचार किया जा रहा है।
इससे ऐसे मरीजों में टीबी की पहचान हो सकेगी, जिनमें बीमारी के लक्षण साफ तौर पर दिखाई नहीं देते। समय रहते बीमारी का पता चलने पर इलाज भी जल्द शुरू किया जा सकेगा।
एलजी ने की समीक्षा बैठक
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की समीक्षा के दाैरान यह निर्देश दिए। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज सिंह, मुख्य सचिव राजीव वर्मा और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
यह इस अभियान की दूसरी समीक्षा बैठक थी। इससे पहले 23 जून को भी उपराज्यपाल ने अभियान की समीक्षा की थी। समीक्षा में सामने आया कि टीबी से बचाव के लिए जरूरी उपचार अभी तक केवल 55 प्रतिशत पात्र लोगों तक पहुंच पाया है।
वहीं, अलग-अलग जरूरत के अनुसार टीबी मरीजों की देखभाल की व्यवस्था 74 प्रतिशत तक पहुंची है। सरकार ने 30 सितंबर तक इन दोनों क्षेत्रों में क्रमशः 80 और 90 प्रतिशत तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है। उपराज्यपाल ने अधिकारियों को तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
टीबी की जांच बढ़ाने के लिए अस्पतालों में भर्ती मरीजों की जांच का सुझाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत मरीज या उसके परिवार की सहमति लेने के बाद बीमारी की परवाह किए बिना टीबी की जांच की जा सकती है। इससे टीबी के छिपे हुए मामलों का पता लगाने में मदद मिलेगी।
प्रचार अभायन तेज करने के निर्देश
इसके अलावा टीबी को लेकर लोगों में बनी झिझक और डर कम करने के लिए प्रचार अभियान तेज करने को कहा गया है। खासकर उन इलाकों और स्थानों पर जांच बढ़ाई जाएगी, जहां संक्रमण का खतरा अधिक है और बड़ी संख्या में लोग एक साथ रहते हैं।
समीक्षा के दौरान एलजी ने एआइ आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों के पूरी क्षमता से इस्तेमाल में आ रही रेडियोग्राफरों की कमी को प्राथमिकता के आधार पर दूर करने को कहा। टीबी मरीजों को मिलने वाली सीधे बैंक खाते में सहायता की लंबित रकम का भुगतान भी जल्द पूरा करने को कहा गया है।
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दिल्ली एलजी ने टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की:अस्पताल में भर्ती हर मरीज की टीबी जांच पर जोर
Alpha News 24
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